Tuesday, May 5, 2009

Hindi Yaad Hai

स्कूल में हम हिन्दी पड़ा करते थे. पर 10th class के बाद हिन्दी से नाता ही टूट गया. Mother tongue होने के कारन हिन्दी बोलना तो में नही भूली पर हाँ लिकना जरूर भूल गई हुईं.

अपने इस महान achievement ( इसका हिन्दी मुझे नही आता है!!) का एहसास मुझे हाल में ही हुआ. मेरे yoga- teacher के हिन्दी की जरूरत और उसकी एहमीयत पर lecturer ने मुझे भी सोचने पर मजबूर कर दिया . “क्या करू कभी हिन्दी लिखने की जरूरत ही नही हुई”- ये कह के अपने को उनके सामने बेइज्जत होने से तो बचा लिया. पर बाद में सोचा तो लगा की कुछ तो करना चाहिए.

अब से में कुछ न कुछ हिन्दी में लिखने की कोशिस जरूर करुँगी। पड़ने लायक लिख पाती हुँ की नही, उसका पता तो मुझे भी नही है.
आज के लिए इतना ही खाफी. After all ‘अपनी चादर देख के ही पैर फैलाने चाहिय’ (wow हिन्दी का proverb…I am not that bad)

4 comments:

  1. excellent post... raising an issue that most of us need to address as hindi speaking people...
    i don't have hindi font in my system so can't write in hindi though would love to...
    apki jankari ke liye... achievement ki hindi "uplabdhi" hoti hai... magar ek tareeka hai aisi paristhiti se bechane ka... kam se kam padh to sakte hain hindi... vyakaran me galatiyan na ho is bat ka dhyan rakhen... magar uttam prayas ;)

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  2. Thanx a lot:)and ya will try to keep grammar correct in next post....

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  3. mother tongue = मटरू बाशा :D

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  4. Thanx...will remember this while wrting next post:)

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